Raghav Chadha के नेतृत्व में AAP के 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल
अप्रैल, 25 2026
राजनीति में अक्सर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन 24 अप्रैल 2026 की शाम आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस बगावत की कमान पार्टी के वरिष्ठ चेहरे राघव चड्ढा, राज्यसभा सांसद ने संभाली, जिन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इस बड़े राजनीतिक उलटफेर की घोषणा की।
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय समन्वयक के तौर पर कोर्ट के आदेश के बाद 95 लोधी एस्टेट स्थित टाइप-7 सरकारी बंगले में शिफ्ट हुए थे, उसी शाम उनकी अपनी पार्टी के पैरों तले जमीन खिसक गई। दोपहर में नए घर की खुशी और शाम तक पार्टी के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों का जाना, केजरीवाल के लिए एक बेहद नाटकीय दिन साबित हुआ।
बगावत की कहानी: कैसे हुआ यह बड़ा उलटफेर?
24 अप्रैल 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने साफ कर दिया कि अब वह और उनके साथी सांसद AAP के साथ नहीं हैं। इस मौके पर उनके साथ सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे। इस बगावत में सबसे चौंकाने वाला नाम स्वाति मालीवाल का रहा।
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो यह बगावत मुख्य रूप से पंजाब केंद्रित नजर आती है। पंजाब से AAP के कुल सात राज्यसभा प्रतिनिधियों में से छह ने इस विद्रोह में हिस्सा लिया। जैसे ही चड्ढा ने अपनी बात पूरी की, नितिन नवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष of भारतीय जनता पार्टी, ने तुरंत इन सभी सात सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।
- कुल दलबदल करने वाले सांसद: 7
- पंजाब से आए सांसदों की संख्या: 6
- पार्टी की कुल ताकत में गिरावट: लगभग 70%
- तारीख: 24 अप्रैल 2026
- मुख्य चेहरा: राघव चड्ढा
अंदरूनी कलह और डिप्टी लीडर की कुर्सी का खेल
यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसके बीज अप्रैल की शुरुआत में ही बो दिए गए थे। करीब 2 अप्रैल 2026 को AAP नेतृत्व ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था। यह कदम काफी चर्चा में रहा क्योंकि चड्ढा और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच काफी समय से अनबन चल रही थी।
हैरानी की बात तो यह है कि चड्ढा की जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल, चांसलर of Lovely Professional University, को डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब जिन अशोक मित्तल को चड्ढा को हटाने के लिए लाया गया था, उन्होंने खुद चड्ढा का साथ दिया और बगावत का हिस्सा बन गए। (सोचिए, जिस व्यक्ति को केजरीवाल ने भरोसा करके नियुक्त किया, उसने ही उन्हीं की पीठ में छुरा घोंपा)।
सूत्रों की मानें तो पार्टी ने तो हद ही कर दी थी। चड्ढा को पद से हटाने के बाद, AAP ने राज्यसभा सचिवालय को निर्देश दे दिए थे कि संसदीय सत्र के दौरान राघव चड्ढा को बोलने का समय न दिया जाए। यह एक तरह से उन्हें सार्वजनिक रूप से चुप कराने की कोशिश थी, जिसने शायद उन्हें BJP की ओर धकेल दिया।
केजरीवाल की प्रतिक्रिया और राजनीतिक असर
जब यह खबर फैली, तो अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा किया। हालांकि, उनके पोस्ट में बगावत का जिक्र कम और अपने नए घर का विवरण ज्यादा था। उन्होंने लिखा, "पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने कोर्ट के आदेश पर मुझे राष्ट्रीय समन्वयक के तौर पर घर आवंटित किया है। मैं अब अपने परिवार के साथ उस घर में शिफ्ट हो गया हूँ।"
लेकिन यह 'पॉजिटिव अपडेट' शाम तक एक राजनीतिक संकट में बदल गया। AAP के लिए यह केवल सांसदों का जाना नहीं है, बल्कि पंजाब में उनकी पकड़ पर एक बड़ा सवालिया निशान है। राज्यसभा में 10 से घटकर केवल 3 सांसदों तक सिमट जाना पार्टी की संसदीय ताकत को गंभीर रूप से कमजोर करता है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों यह एक बड़ा झटका है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब के 6 सांसदों का एक साथ जाना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर पंजाब के नेताओं और दिल्ली नेतृत्व के बीच समन्वय की भारी कमी थी। यह बगावत केवल पद की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधारा और सम्मान की लड़ाई बन गई थी। जब एक ही दिन में नेतृत्व अपना घर बदल रहा हो और सांसद अपनी पार्टी, तो यह किसी बड़ी राजनीतिक सुनामी का संकेत होता है।
आगे की राह: अब क्या होगा?
अब सवाल यह है कि क्या AAP इस नुकसान की भरपाई कर पाएगी? पार्टी को अब अपने बचे हुए सांसदों को एकजुट करने और पंजाब में अपनी रणनीति दोबारा बनाने की जरूरत होगी। वहीं BJP के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि उसने न केवल संख्यात्मक बढ़त हासिल की है, बल्कि AAP के एक प्रभावशाली चेहरे राघव चड्ढा को अपने पाले में कर लिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बगावत का असर पंजाब की विधानसभा या अन्य राज्यों के चुनावों पर पड़ता है। फिलहाल, AAP के लिए यह दिन एक बुरे सपने जैसा रहा, जिसने पार्टी की आंतरिक कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राघव चड्ढा और उनके साथियों ने BJP क्यों ज्वाइन की?
इसका मुख्य कारण पार्टी के भीतर आंतरिक तनाव और राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया जाना था। इसके अलावा, सचिवालय को उन्हें बोलने से रोकने के निर्देश दिए गए थे, जिससे नाराज होकर उन्होंने बगावत का रास्ता चुना।
इस बगावत से AAP को कितना नुकसान हुआ?
AAP को बहुत बड़ा झटका लगा है क्योंकि उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसद चले गए, यानी पार्टी ने अपनी 70% ऊपरी सदन की ताकत खो दी है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब से हुआ है जहां 7 में से 6 सांसद BJP में चले गए।
अशोक मित्तल की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में क्या थी?
अशोक मित्तल को अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा की जगह डिप्टी लीडर नियुक्त किया था। विडंबना यह रही कि जिस व्यक्ति को चड्ढा के विकल्प के तौर पर लाया गया, उन्होंने अंत में चड्ढा का ही साथ दिया और पार्टी के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
क्या अरविंद केजरीवाल ने इस दलबदल पर कोई आधिकारिक बयान दिया?
केजरीवाल ने सीधे तौर पर दलबदल पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि X पर अपने नए सरकारी बंगले (95 लोधी एस्टेट) में शिफ्ट होने की जानकारी साझा की, जिसे कई लोग राजनीतिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
jagrut jain
अप्रैल 27, 2026 AT 12:21वाह क्या टाइमिंग है घर बदला और साथ ही साथ सांसद भी बदल गए
Dr. Sanjay Kumar
अप्रैल 28, 2026 AT 22:27भाई ये तो एकदम फिल्मी सीन हो गया है
एक तरफ नए बंगले की खुशी और दूसरी तरफ पार्टी की ऐसी हालत
केजरीवाल जी के लिए इससे बुरा दिन नहीं हो सकता था
Sathyavathi S
अप्रैल 30, 2026 AT 07:07ओह माय गॉड! स्वाति मालीवाल का नाम इसमें देखकर तो मैं दंग रह गई
सोचो क्या चल रहा होगा पार्टी के अंदर
राघव चड्ढा ने तो पूरी गेम ही पलट दी
और वो अशोक मित्तल वाला ट्विस्ट तो एकदम तगड़ा था
मतलब जिसे भरोसा किया उसी ने धोखा दे दिया
कितना ड्रामा है यार इस पॉलिटिक्स में
पंजाब के छह सांसदों का एक साथ जाना कोई मामूली बात नहीं है
पार्टी की तो पूरी कमर ही टूट गई
केजरीवाल जी का ट्वीट तो और भी मजेदार है
जैसे उन्हें पता ही नहीं कि उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है
ये तो बस शुरुआत है
अब देखना होगा कि पंजाब में क्या होता है
इतने बड़े लेवल पर बगावत तो पहले कभी नहीं देखी
यह सब बहुत ही शॉकिंग है
सच में पॉलिटिक्स में कुछ भी भरोसा नहीं किया जा सकता
priyanka rajapurkar
मई 1, 2026 AT 21:37हाँ भाई सही है
सब लोग अपनी अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं
ईमानदारी की बातें तो बस भाषणों में अच्छी लगती हैं
Ashish Gupta
मई 2, 2026 AT 07:07भाई ये तो तगड़ा झटका है 💥
लेकिन बीजेपी ने तो कमाल कर दिया सबको अपने पाले में लेकर 🔥
Pankaj Verma
मई 3, 2026 AT 17:23राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह पंजाब में AAP की पकड़ कमजोर होने का संकेत है
जब स्थानीय नेतृत्व और दिल्ली के बीच तालमेल खत्म होता है तो ऐसा ही होता है
Arumugam kumarasamy
मई 5, 2026 AT 10:49अत्यंत स्वाभाविक है कि जो लोग केवल अवसरवादी होते हैं वे अंततः उसी दिशा में जाते हैं जहाँ उन्हें शक्ति दिखती है। राष्ट्रहित से ऊपर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं रही हैं इन लोगों की।
Santosh Sharma
मई 5, 2026 AT 12:28चलो देखते हैं आगे क्या होता है
सबको अपनी गलती से सीखना चाहिए
ANISHA SRINIVAS
मई 6, 2026 AT 06:23इतने तनाव के बीच भी लोग अपनी राह खोज ही लेते हैं 😊
उम्मीद है कि यह बदलाव कुछ सकारात्मक लेकर आएगा!
Rashi Jain
मई 7, 2026 AT 13:32अगर हम इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक लोकतंत्र की कमी किसी भी पार्टी के लिए घातक हो सकती है और जब किसी वरिष्ठ नेता जैसे राघव चड्ढा को सार्वजनिक रूप से चुप कराने की कोशिश की जाती है तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं जो यहाँ बीजेपी के रूप में सामने आया है।
Pranav nair
मई 9, 2026 AT 00:54बेचारा केजरीवाल... एक तरफ नया घर और दूसरी तरफ ये सब 😅
Suraj Narayan
मई 9, 2026 AT 22:33बीजेपी ने बाजी मार ली है अब पंजाब में उनकी ताकत बढ़ेगी
Raman Deep
मई 11, 2026 AT 15:31ये तो बहुत बडा झटका है भाई 😱
सब कुछ पलट गया
Mayank Rehani
मई 12, 2026 AT 04:29पार्टी का यह 'attrition rate' वास्तव में चिंताजनक है और रणनीतिक रूप से यह एक बड़ा सेटबैक है
Suman Rida
मई 12, 2026 AT 17:38संयम रखना जरूरी है
समय बताएगा कौन सही था
sachin sharma
मई 12, 2026 AT 22:16सब ठीक होगा
बस देखते रहो
Robin Godden
मई 13, 2026 AT 21:11हमें आशा है कि सभी राजनेता देश के हित में कार्य करेंगे।