LPG संकट में ₹2000 का इलेक्ट्रिक कुकर बना घरों की बचाव रणनीति
मार्च, 21 2026
जब गैस सिलेंडर की कीमत दोगुनी हो गई और बाजार में गैस की कमी के कारण घरों में खाना बनाना लगभग असंभव हो गया, तो एक छोटा सा इलेक्ट्रिक कुकर — सिर्फ ₹2000 में — भारत के लाखों घरों की जिंदगी बदल रहा है। Aaj Tak की 10 मार्च, 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह छोटा सा उपकरण उन लोगों के लिए एक बचाव रणनीति बन गया है जिनके पास गैस सिलेंडर नहीं है, या जिन्हें उसकी कीमत भुगतान करने की ताकत नहीं।
गैस की कमी का असली दर्द
पिछले तीन महीनों से भारत के कई राज्यों — खासकर उत्तर और पश्चिमी भारत — में LPG की आपूर्ति में भारी कमी हो रही है। यह संकट बीच में तनाव बढ़ने के कारण बना है, जिसके चलते निर्यातक देशों ने भारत के लिए गैस की आपूर्ति कम कर दी। अब बाजार में काला बाजार खिल उठा है: एक सिलेंडर की कीमत ₹1,500 से बढ़कर ₹3,000 तक पहुँच गई है। कई लोगों ने बताया कि वे अपने रोज़ के खाने के लिए गैस के बजाय चावल और दाल बर्तन में उबाल रहे हैं — लेकिन उनके पास आम तौर पर बिजली का बिल भी बहुत ज्यादा नहीं भरने की ताकत है।
इलेक्ट्रिक कुकर क्या है और कैसे काम करता है?
यह उपकरण एक छोटे इलेक्ट्रिक केतली जैसा दिखता है, लेकिन इसकी क्षमता किसी छोटे स्टोव से कम नहीं। Amazon पर इसकी कीमत ₹2,000 है, जबकि कई अन्य प्लेटफॉर्म इसे ₹1,800 से शुरू करके बेच रहे हैं। इसकी क्षमता सिर्फ 1.2 लीटर है — एक या दो लोगों के लिए पर्याप्त। 600 वाट की पावर से यह पानी को 5 मिनट में उबाल देता है। इसके अंदर नॉन-स्टिक सेरामिक कोटिंग है, जिससे खाना चिपकता नहीं और साफ करना बहुत आसान हो जाता है। एक ग्लास लिड इसे और भी यूनिक बनाता है — आप देख सकते हैं कि दाल कैसे उबल रही है, या कितनी देर तक अंडे उबल रहे हैं।
इसका इस्तेमाल दाल, चावल, सब्जियाँ, सूप, चाय-कॉफी, मैगी, पास्ता, और अंडे उबालने तक के लिए किया जा सकता है। यह उपकरण खासकर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो छात्रावास, PG, ऑफिस के कैबिन, या छोटे कमरों में रहते हैं। यह इतना हल्का है कि एक बैग में आसानी से फिट हो जाता है — यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह एक जादुई साथी बन गया है।
कौन इसका इस्तेमाल कर रहा है?
दिल्ली के एक PG आवास में रहने वाली नीतू ने बताया, "हमारे यहाँ गैस तीन दिन से नहीं आई। इस कुकर ने हमारे दिन को बचा लिया। अब मैं रोज़ चाय बना लेती हूँ, और दाल भी इसी में उबाल लेती हूँ।" उसके कमरे में दो और लड़कियाँ भी इसी तरह का उपकरण इस्तेमाल कर रही हैं।
बैंगलोर में एक फ्रीलांसर ने बताया कि उसके ऑफिस में गैस का बिल अब उसके महीने के किराए से ज्यादा है। उसने इस कुकर को खरीदा और अब वह दोपहर का खाना अपने डेस्क पर ही बना लेता है। "मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक छोटा सा बर्तन मेरी जिंदगी इतना बदल सकता है," उसने कहा।
क्या यह स्थायी समाधान है?
नहीं। यह एक अस्थायी बचाव है। यह कुकर एक बड़े खाने को तैयार नहीं कर सकता — न तो भाप लगाने के लिए उपयुक्त है, न ही बड़े पैमाने पर तलने के लिए। लेकिन जब आपके पास गैस नहीं है, तो यह एक अच्छा विकल्प है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारत में बिजली-आधारित खाना पकाने की एक नई आदत की शुरुआत हो सकती है। बिजली का बिल बढ़ रहा है, लेकिन गैस का बिल उससे भी ज्यादा बढ़ रहा है। अब लोग यह समझ रहे हैं कि बिजली का उपयोग भी एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है।
भविष्य क्या है?
इस कुकर की बिक्री पिछले 45 दिनों में 300% बढ़ गई है। अब कई भारतीय कंपनियाँ इसी तरह के उत्पादों को लॉन्च कर रही हैं — कुछ में टाइमर, कुछ में वायरलेस चार्जिंग, कुछ में ऐप-कनेक्टेड फीचर्स। यह सिर्फ एक उपकरण नहीं है — यह एक संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब अपनी आवश्यकताओं के लिए अपने आप को अनुकूलित कर रहे हैं।
सरकार अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दे चुकी। लेकिन अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो शायद अगले साल हम देखेंगे कि नए घरों में गैस स्टोव के बजाय इलेक्ट्रिक कुकर को मानक बनाया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह इलेक्ट्रिक कुकर सभी प्रकार के खाने के लिए उपयुक्त है?
नहीं, यह छोटे आकार के खाने जैसे दाल, चावल, सब्जियाँ, चाय-कॉफी, मैगी और अंडे उबालने के लिए बनाया गया है। यह बड़े पैमाने पर तलावट, भाप लगाने या बड़े बर्तनों में खाना बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है। इसकी क्षमता सिर्फ 1.2 लीटर है — एक या दो लोगों के लिए पर्याप्त।
इसका बिजली का बिल कितना बढ़ जाता है?
600 वाट का यह उपकरण एक दिन में 20-30 मिनट तक चलता है — यानी लगभग 0.3-0.4 यूनिट बिजली खपत होती है। एक महीने में यह सिर्फ 10-12 यूनिट तक हो सकता है, जो ₹60-80 के बराबर है। इसके खिलाफ गैस का बिल अब ₹1,500-3,000 तक जा रहा है।
क्या यह उपकरण ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपयोगी है?
हाँ, लेकिन शर्त है कि बिजली की आपूर्ति स्थिर हो। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बिजली की आपूर्ति अनियमित है, लेकिन जहाँ बिजली उपलब्ध है, यह एक बहुत बड़ा फायदा है — खासकर जब गैस की आपूर्ति बिल्कुल नहीं हो रही हो।
क्या इसका इस्तेमाल सुरक्षित है?
हाँ, अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। इसमें ओवरहीटिंग और ओवरलोड प्रोटेक्शन है। गैस स्टोव की तरह गैस लीक या आग का खतरा नहीं है। लेकिन इसे बच्चों या अनुभवहीन लोगों के लिए अकेले छोड़ना नहीं चाहिए।
Mona Elhoby
मार्च 23, 2026 AT 02:29Arjun Kumar
मार्च 23, 2026 AT 22:10RAJA SONAR
मार्च 25, 2026 AT 08:22Mukesh Kumar
मार्च 27, 2026 AT 03:53Shraddhaa Dwivedi
मार्च 27, 2026 AT 07:59Govind Vishwakarma
मार्च 27, 2026 AT 22:35Jamal Baksh
मार्च 28, 2026 AT 04:48Shankar Kathir
मार्च 29, 2026 AT 04:55Bhoopendra Dandotiya
मार्च 30, 2026 AT 02:14Firoz Shaikh
मार्च 30, 2026 AT 20:03