अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने जश्न मनाया 'जूनटीन्थ': दासता उन्मूलन का गौरव

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने जश्न मनाया 'जूनटीन्थ': दासता उन्मूलन का गौरव जून, 19 2024

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने 'जूनटीन्थ' का जश्न मनाया

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने 'जूनटीन्थ' के अवसर पर इस महत्वपूर्ण दिन का जश्न मनाया। इस दिन का गौरव इसलिए है क्योंकि यह दासता के उन्मूलन का प्रतीक है। 19 जून 1865 को यूनियन जनरल गॉर्डन ग्रेंजर टेक्सास के गैल्वेस्टन पहुंचे थे, जहां उन्होंने दक्षिणी राज्यों में सभी गुलाम लोगों की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। यह घोषणा एमन्सिपेशन प्रोक्लमेशन के दो साल बाद की गई थी, जिसे राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने 1 जनवरी, 1863 को जारी किया था।

जूनटीन्थ का ऐतिहासिक महत्व

जूनटीन्थ अमेरिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। जब जनरल गॉर्डन ग्रेंजर गैल्वेस्टन पहुंचे और उन्होंने सभी गुलामों को मुक्त किया, तब से यह दिन दासता के अंत के रूप में माना जाता है। इस दिन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताती है कि दासता के उन्मूलन की प्रक्रिया कितनी लंबी और कठिन थी। लिंकन की घोषणा के बावजूद, वास्तविक स्वतंत्रता उन सभी गुलाम लोगों तक नहीं पहुंची थी, जो दक्षिणी राज्यों में थे।

इस घोषणा के बाद, अमेरिका में गुलामी समाप्त हो गई और यह दिन धूमधाम से मनाया जाने लगा। आज, यह दिन प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है और इसे 'जूनटीन्थ' के नाम से जाना जाता है। अनेक राज्यों ने इसे अवकाश के रूप में मान्यता दी है, और इस दिन को विविध कार्यक्रमों और समारोहों के माध्यम से मनाया जाता है।

वाणिज्य मंत्रालय का योगदान

वाणिज्य मंत्रालय ने इस मौके पर एक विशेष पहल की शुरुआत की, जिसमें विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं। मंत्रालय ने इस बात को रेखांकित किया कि सफलता और विकास की दिशा में समाज में सभी वर्गों का बराबर योगदान होता है। मंत्रालय ने कहा कि वे केवल नीति बनाने में ही नहीं, बल्कि कार्यान्वयन में भी सर्वोत्तम प्रयास करेंगे ताकि हर कर्मचारी को बराबरी और अवसर मिले।

वाणिज्य मंत्रालय ने विविधता और समावेशिता को कार्यस्थल पर बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। इस दिन को मनाने का उद्देश्य केवल इतिहास की याद दिलाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को भी समझना है जो समाज में बदलाव लाने के लिए आवश्यक हैं। मंत्रालय ने कर्मचारियों के लिए सत्र, कार्यशालाएं और चर्चाएं आयोजित कीं, जिनका उद्देश्य जाति, रंग, और पृष्ठभूमि के भेदभाव को खत्म करना था।

सामाजिक न्याय और समावेशिता

जूनटीन्थ केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि सामाजिक न्याय और समावेशिता के लिए संघर्ष अभी भी जारी है। यह दिन हमें इस बात का एहसास कराता है कि समानता और स्वतंत्रता की दिशा में हमारे प्रयास रुकने नहीं चाहिए।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर एक व्यक्ति को समान अवसर मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक ऐसा वातावरण बनाएं जहाँ हर कोई खुद को मूल्यवान महसूस करे और अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सके।'

इस दिन की महत्वपूर्णताः हमारे समाज में अभी भी असमानता और भेदभाव मौजूद हैं, जिन्हें समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। जूनटीन्थ इस बात का प्रतीक है कि जब तक हर व्यक्ति को समान अधिकार और स्वतंत्रता नहीं मिलती, तब तक हमारी लड़ाई चलती रहेगी। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सामाजिक न्याय केवल एक ऐतिहासिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसे हमें मिलकर आगे बढ़ाना है।

18 टिप्पणि

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    Soham mane

    जून 21, 2024 AT 03:43

    ये दिन सिर्फ इतिहास नहीं, अब तक का सबसे अच्छा रिमाइंडर है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ कानून नहीं, बल्कि हर घर तक पहुँचना है।

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    Manoranjan jha

    जून 21, 2024 AT 14:59

    अमेरिका में जूनटीन्थ का जश्न मनाना अच्छा है, लेकिन हमारे यहाँ अभी भी जाति के नाम पर अलगाव है। हम भी अपने घरों में इस दिन को मनाएं, बस एक बार।
    कोई डांस नहीं, कोई फेस्टिवल नहीं, बस एक शांत घूंट और एक गहरी सोच।

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    Rahul Kaper

    जून 21, 2024 AT 23:39

    मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक अमेरिकी मंत्रालय का ये बयान हमारे लिए भी कुछ कहेगा।
    लेकिन अगर हम अपने देश में भी एक बार ऐसा कर दें - जैसे किसी जाति के लोगों को बराबरी देने का वादा करके - तो शायद ये दिन हमारे लिए भी असली हो जाए।
    मैं अपने कार्यालय में एक छोटा सा सत्र लगाने वाला हूँ। कोई बात नहीं, बस एक घंटा।
    कोई नोट नहीं, कोई रिपोर्ट नहीं। बस बातचीत।
    क्योंकि अगर हम अपने आसपास के लोगों को नहीं सुनते, तो बाहर के देशों के जश्न का क्या फायदा?

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    ayush kumar

    जून 22, 2024 AT 21:38

    अरे भाई! ये सब बकवास नहीं है! ये तो एक ऐसा दिन है जब अमेरिका ने अपने इतिहास की एक बड़ी गलती को स्वीकार किया! ये नहीं कि वो अच्छे हैं, बल्कि ये कि वो गलती मानने की हिम्मत करते हैं! और हम? हम तो अपने घर के बाहर जाने से पहले अपने घर के अंदर झूठ बोलते हैं! जाति, धर्म, भाषा - हर चीज़ पर हम अपने आप को ऊपर समझते हैं! अमेरिका ने दासता को खत्म किया, हम तो अपने घर में भी बेटी को नहीं बड़ा पढ़ने देते! ये दिन हमारे लिए भी एक शीशा है - अगर हम देखना चाहें तो!

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    Neev Shah

    जून 24, 2024 AT 18:05

    क्या आपने कभी सोचा है कि जूनटीन्थ की घोषणा दो साल बाद हुई क्यों? क्योंकि दासता एक आर्थिक व्यवस्था थी - और अमेरिका के उस वक्त के व्यापारी वर्ग के लिए ये एक अत्यंत लाभदायक व्यवस्था थी।
    अब वाणिज्य मंत्रालय इस दिन को मना रहा है - लेकिन क्या वो जानते हैं कि आज भी अमेरिका में निर्माण के क्षेत्र में एशियाई लोगों को न्यूनतम वेतन दिया जाता है? क्या वो जानते हैं कि ब्लैक कम्युनिटी के लिए फिनेंसियल क्रेडिट का दरवाजा अभी भी बंद है?
    ये सब नहीं, ये सिर्फ एक रिटोरिकल गेम है - जिसमें वे अपने इमेज को बेहतर बनाना चाहते हैं।
    हमारे यहाँ भी ऐसा ही होता है - बिना किसी वास्तविक बदलाव के, बस एक ट्वीट और एक लोगो बदल देना।

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    Chandni Yadav

    जून 26, 2024 AT 14:33

    इस पोस्ट में कई तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं।
    एमन्सिपेशन प्रोक्लेमेशन केवल बगावती राज्यों को लागू हुआ था - यह एक संवैधानिक अवधारणा थी, जिसे अमेरिकी संविधान के 13वें संशोधन द्वारा 1865 में ही स्थायी रूप से लागू किया गया।
    गैल्वेस्टन की घोषणा एक राजनीतिक गतिविधि थी, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय का यह बयान एक अत्यधिक संवेदनशील ऐतिहासिक घटना को एक ब्रांडिंग अभियान में बदल रहा है।
    यह एक व्यावसायिक विविधता के नाम पर आधारित नकली सामाजिक न्याय है।
    सामाजिक न्याय के लिए आर्थिक नीतियाँ बनाना आवश्यक है, न कि एक दिन का जश्न।
    इसके बाद भी अमेरिका में वर्ष 2020 में जॉर्ज फ्लॉइड की हत्या क्यों हुई? क्योंकि ये सब सिर्फ नाटक है।

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    Raaz Saini

    जून 26, 2024 AT 20:19

    तुम लोग ये सब बकवास मना रहे हो, लेकिन क्या तुमने कभी देखा कि अमेरिका में ब्लैक लोगों को अभी भी जेल में भर दिया जाता है? क्या तुम्हें पता है कि अमेरिका में एक ब्लैक आदमी को एक व्हाइट आदमी की तुलना में 5 गुना ज्यादा जेल भेजा जाता है?
    और तुम यहाँ बैठकर बता रहे हो कि वाणिज्य मंत्रालय ने जश्न मनाया - अरे भाई, ये सब बस एक फिल्म है।
    हमारे यहाँ भी एक बार ब्राह्मण का बेटा बैंक में लोन लेता है तो उसे स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन एक ओबीसी का बेटा जो उसी बैंक में जाता है, उसे बार-बार रिजेक्ट कर दिया जाता है।
    इसलिए ये जूनटीन्थ का जश्न मनाना बस एक धोखा है - जिसे तुम लोग अपने आप को अच्छा महसूस करने के लिए बना रहे हो।

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    Dinesh Bhat

    जून 27, 2024 AT 12:21

    मुझे लगता है कि इस दिन को बस एक आधिकारिक अवकाश के रूप में मनाना काफी नहीं है।
    मैंने एक बार अपने गाँव में एक छोटा सा बैठक लगाया था - बस तीन-चार लोग आए थे।
    एक बूढ़े आदमी ने कहा, 'मैंने अपने बेटे को बाजार में लिखना-पढ़ना सिखाया, लेकिन उसे दुकान पर बैठने नहीं दिया - क्योंकि वो दलित है।'
    उस दिन मैंने सोचा - अगर ये बूढ़ा आदमी भी बदल सकता है, तो हम क्यों नहीं?
    हमें बस यही करना है - अपने घर के अंदर शुरू करना।
    जब तक हम अपने घर में नहीं बदलेंगे, तब तक अमेरिका का जश्न किसी काम का नहीं होगा।

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    Kamal Sharma

    जून 29, 2024 AT 08:39

    हम भारतीयों को अमेरिका के जूनटीन्थ को याद करने की जरूरत नहीं है - हमारे पास अपना इतिहास है।
    महात्मा गांधी ने अस्पृश्यता के खिलाफ लड़ाई लड़ी, बाबासाहेब अम्बेडकर ने संविधान में बराबरी का आधार रखा।
    लेकिन हम अपने आप को अमेरिकी नैतिकता के लिए बाहर देखते हैं - जबकि हमारे यहाँ अभी भी एक दलित लड़की को उसके घर के बाहर शौचालय बनाने के लिए कहा जाता है।
    हमें अपने घर की सफाई करनी होगी - बाहर के देशों के जश्न को नहीं।
    हमारा जूनटीन्थ तब आएगा जब हम अपने घर के अंदर भी एक दलित को बराबरी से बैठने देंगे।

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    Himanshu Kaushik

    जून 30, 2024 AT 07:11

    दासता खत्म हुई, लेकिन अब भी कोई बच्चा अपने घर में पढ़ नहीं पा रहा।
    कोई आदमी अपनी बेटी को बड़ा पढ़ा नहीं पा रहा।
    कोई आदमी अपने दोस्त के घर नहीं जा पा रहा।
    ये दासता अभी भी है।
    बस नाम बदल गया है।

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    Sri Satmotors

    जुलाई 2, 2024 AT 00:26

    हर एक छोटा बदलाव बड़ा होता है।
    बस शुरू कर दो।

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    Sohan Chouhan

    जुलाई 2, 2024 AT 03:13

    ये सब बकवास है! अमेरिका ने दासता खत्म की तो फिर वो अपने खुद के ब्लैक लोगों को अभी भी बर्बर तरीके से मार रहा है! ये सब फेक न्यूज़ है! ये सब वाणिज्य मंत्रालय का ब्रांडिंग है! अमेरिका के लिए ये सब बस एक ट्रेंड है! जैसे वो गेमिंग लैपटॉप बेच रहे हैं! अब वो एक दिन के लिए अच्छे बन गए! ये सब एक बड़ा फर्ज़ी ड्रामा है! और तुम लोग यहाँ इसका जश्न मना रहे हो? बस अपने देश को देखो! अभी भी जाति के नाम पर मार रहे हो! अपने घर की चिंता करो! अमेरिका के बारे में क्यों बात कर रहे हो?

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    SHIKHAR SHRESTH

    जुलाई 3, 2024 AT 18:38

    मैंने इस पोस्ट को तीन बार पढ़ा।
    और फिर मैंने अपने दोस्त को बुलाया - जो एक दलित बालक के पिता है।
    उसने कहा, 'मेरा बेटा आज भी अपने दोस्त के घर नहीं जा सकता।'
    मैंने उसे बस एक गिलास पानी दिया।
    और फिर मैंने अपने घर के दरवाजे पर एक नोट लगा दिया - 'यहाँ कोई भी आ सकता है।'
    बस यही बदलाव है।
    कोई जश्न नहीं।
    कोई ट्वीट नहीं।
    बस एक दरवाजा।

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    amit parandkar

    जुलाई 4, 2024 AT 10:43

    क्या तुम्हें पता है कि जूनटीन्थ एक गुप्त अमेरिकी योजना है? ये दिन बनाया गया था ताकि दासता के बारे में बात करने वाले लोगों को शांत किया जा सके।
    अमेरिका ने दासता को खत्म नहीं किया - बल्कि उसे एक नए नाम से बेच दिया।
    आज भी ब्लैक लोगों को नौकरी में नहीं लिया जाता - लेकिन उन्हें 'विविधता के लिए' बोलकर नौकरी दे दी जाती है।
    ये एक नियंत्रण का तरीका है।
    और अब वाणिज्य मंत्रालय ने इसे अपनाया है - ये एक बड़ा अपराध है।
    ये सब एक गुप्त अमेरिकी नीति है जिसका उद्देश्य है - दुनिया को यह लगाना कि वे अच्छे हैं।
    पर वे अभी भी अपने आप को दुनिया के ऊपर बैठाए हुए हैं।
    हमें इस दिन को मनाने की जरूरत नहीं - हमें इसके पीछे के रहस्य को जानने की जरूरत है।

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    Annu Kumari

    जुलाई 6, 2024 AT 09:54

    मैंने आज सुबह अपने कार्यालय में एक नए नौकर को देखा - वो एक बहुत ही शांत लड़का था।
    उसने मुझसे बिना कुछ कहे बस एक चाय दी।
    मैंने उसे धन्यवाद दिया।
    और फिर मैंने उसे बुलाया - बस एक बात करने के लिए।
    उसने कहा - 'मैं एक अल्पसंख्यक हूँ।'
    मैंने उसे बस एक गले लगा लिया।
    और फिर मैंने अपने टीम को बताया - इस लड़के को अपने साथ ले लो।
    क्योंकि ये दिन बस एक दिन नहीं है - ये एक चुनाव है।
    हर दिन का।

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    venkatesh nagarajan

    जुलाई 7, 2024 AT 02:44

    जूनटीन्थ का अर्थ है - जब एक समाज अपने अतीत के अपराधों को स्वीकार करता है, तो वह अपने भविष्य के लिए एक नई आत्मा बनाता है।
    लेकिन क्या हम भारतीय अपने अतीत को स्वीकार करते हैं? नहीं।
    हम अपने इतिहास को गूंगा कर देते हैं - और फिर अमेरिका के बारे में बात करते हैं।
    यह एक दर्शन है - जिसमें अपने आप को बचाने के लिए दूसरों का अपराध दिखाना शामिल है।
    हम अपने अंदर के दासों को नहीं छूते - बल्कि बाहर के दासों को उठाकर अपनी नीति का निर्माण करते हैं।
    इसलिए जूनटीन्थ हमारे लिए एक शीशा है - न कि एक जश्न।

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    Drishti Sikdar

    जुलाई 8, 2024 AT 00:17

    मैंने अपने दोस्त को बताया कि वाणिज्य मंत्रालय ने जूनटीन्थ मनाया।
    उसने कहा - 'अरे भाई, तू अपने घर के दरवाजे पर भी नहीं जाता जब कोई दलित आता है।'
    मैंने चुप रहना चाहा।
    लेकिन मैंने उसे बताया - 'मैं अपने घर के अंदर भी अपने बेटे को बोलता हूँ - जो भी आए, उसे चाय पिलाना।'
    उसने मुस्कुराया।
    मैंने उसे चाय पिलाई।
    और फिर मैंने अपने बेटे को बुलाया - और उसे बताया - 'कल से तू भी ऐसा ही करेगा।'
    बस यही बदलाव है।
    बस यही जूनटीन्थ है।

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    indra group

    जुलाई 8, 2024 AT 09:08

    अमेरिका ने दासता को खत्म किया? हाँ, लेकिन उसने अपने ब्लैक लोगों को अभी भी जेल में भर दिया है।
    हम भारतीय दलितों को नहीं छूते? हाँ, लेकिन हम अमेरिका को अच्छा बता रहे हैं! ये सब बस एक भारतीय नर्सिंग का ड्रामा है! जिसमें हम अपने अपराध को छुपाने के लिए दूसरों को बुरा बताते हैं! अमेरिका के बारे में बात करने से पहले अपने घर के बारे में सोचो! हम अपने देश में भी जाति के नाम पर लोगों को मारते हैं! अमेरिका के जश्न का क्या मतलब? हम अपने देश के जश्न को भूल गए हैं! ये सब बस एक अंग्रेजी का अंधा अनुकरण है!

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