आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट: राघव चड्ढा की छुट्टी, अपनों ने ही लगाए गंभीर आरोप
अप्रैल, 4 2026
आम आदमी पार्टी के भीतर की कलह अब सड़क पर आ गई है। राघव चड्ढा, जो राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर थे, उन्हें अचानक इस पद से हटा दिया गया। उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर चल रही उस गहरी खींचतान का नतीजा है जिसने अब सोशल मीडिया पर एक खुले युद्ध का रूप ले लिया है।
बात सिर्फ पद हटाने तक सीमित नहीं रही। पार्टी के ही वरिष्ठ नेता अब चड्ढा पर सार्वजनिक रूप से हमलावर हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी की पहचान 'पारदर्शिता' थी, वहां अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मामला तब और गरमा गया जब चड्ढा ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें चुप कराया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं।
अपनों ने ही साधा निशाना: अनुशासनहीनता के आरोप
दिल्ली के दिग्गज नेता और सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो जारी कर राघव चड्ढा की जमकर क्लास ली। भारद्वाज का सीधा आरोप है कि चड्ढा पार्टी की तय लाइन से भटक गए हैं। उन्होंने कहा कि हर नेता को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में काम करना होता है, लेकिन राघव ने अपनी मर्जी से मुद्दे चुनना शुरू कर दिया।
भारद्वाज ने एक गंभीर बात कही कि जब संसद में समय कम होता है, तो प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती हैं। उनके मुताबिक, राघव ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय मामूली विषयों पर समय बर्बाद किया। इतना ही नहीं, उन पर यह भी आरोप लगा कि जब विपक्ष बड़े मुद्दों पर वॉकआउट कर रहा था या विरोध प्रदर्शन कर रहा था, तब चड्ढा गायब थे। भारद्वाज ने कुछ कड़वे उदाहरण भी दिए—जैसे पश्चिम बंगाल चुनाव, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव और गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुई कार्रवाई। सबसे बड़ा हमला तब हुआ जब भारद्वाज ने याद दिलाया कि जब केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब राघव देश से बाहर थे। (सोचिए, पार्टी के संकट के समय अपने सबसे भरोसेमंद चेहरों का साथ न मिलना कितना चुभता होगा!)
वहीं, एक अन्य नेता अनुराग ढांडा ने भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति डर जाए, वह देश के लिए कैसे लड़ेगा? ढांडा ने यहाँ तक कह दिया कि संसद का समय 'समोसों' जैसे तुच्छ मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि गंभीर राष्ट्रीय समस्याओं के लिए होना चाहिए।
राघव चड्ढा का पलटवार: "मैं चुप हुआ हूँ, हारा नहीं"
इन हमलों के बाद राघव चड्ढा शांत नहीं बैठे। 2 अप्रैल, 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक लेकिन तार्किक पोस्ट लिखा— "मुझे चुप कराया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूँ।" उन्होंने एक विस्तृत वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने अपनी उन तमाम स्पीच का लेखा-जोखा दिया, जो उन्होंने आम जनता के भले के लिए संसद में दी थीं।
चड्ढा का सवाल सीधा और तीखा था: "आम आदमी की समस्याओं पर बोलने से पार्टी का क्या नुकसान हुआ?" उन्होंने तर्क दिया कि वे उन मुद्दों को उठाते हैं जिन्हें अक्सर सदन में नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने उन विषयों की सूची भी साझा की जिन पर उन्होंने आवाज उठाई, जिनमें शामिल थे:
- नागरिकों पर बढ़ता टैक्स का बोझ और मोबाइल डेटा चार्ज
- बैंक शुल्क और 28 दिनों वाले रिचार्ज प्लान की समस्या
- खाद्यान्न में मिलावट और एयरपोर्ट पर ग्राहकों के साथ बदसलूकी
- पेपर लीक, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य बीमा के मुद्दे
- पैटर्नलिटी लीव (पितृत्व अवकाश) और किसानों की समस्याएं
नेतृत्व की नाराजगी और 'कॉम्प्रोमाइज' का टैग
पर्दे के पीछे की कहानी और भी जटिल है। खबरों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने संसद सचिवालय को निर्देश दिया था कि राज्यसभा में चड्ढा के बोलने के अवसरों को सीमित किया जाए। यह किसी भी सांसद के लिए एक बड़ा झटका है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस विवाद में एंट्री की। बताया जा रहा है कि मान ने चड्ढा पर "कॉम्प्रोमाइज्ड" (समझौता कर लेने वाला) होने का आरोप लगाया। राजनीतिक गलियारों में इस शब्द का इस्तेमाल अक्सर तब किया जाता है जब किसी नेता पर विपक्षी खेमे के साथ गुप्त सेटिंग का शक हो। हालांकि, चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर इन आरोपों का विस्तृत जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनकी नाराजगी साफ झलक रही है।
क्या यह पार्टी में किसी बड़े विद्रोह की आहट है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक पद बदलने की बात नहीं है। राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली चेहरे का इस तरह अलग-थलग होना संकेत है कि पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष (Power Struggle) चरम पर है। चड्ढा का यह कहना कि "उन्हें चुप कराया गया", यह दर्शाता है कि उनके और पार्टी हाईकमान के बीच संवाद पूरी तरह टूट चुका है।
अब सवाल यह है कि क्या राघव चड्ढा पार्टी छोड़कर नई राह चुनेंगे या फिर इस आंतरिक कलह का कोई समझौता निकलेगा? 3 अप्रैल, 2026 तक की स्थिति तो यही है कि सुलह की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही। दिल्ली की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में कई बड़े उलटफेर कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से क्यों हटाया गया?
पार्टी नेतृत्व ने उन पर पार्टी लाइन से भटकने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप रहने का आरोप लगाया है। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, उन्होंने पार्टी के दिशा-निर्देशों के बाहर जाकर मुद्दे उठाए, जबकि गंभीर संकटों (जैसे केजरीवाल की गिरफ्तारी) के समय वे अनुपस्थित या शांत रहे।
राघव चड्ढा ने अपनी सफाई में क्या कहा?
चड्ढा ने दावा किया कि उन्होंने हमेशा आम जनता के हितों, जैसे टैक्स बोझ, मोबाइल डेटा शुल्क और किसानों के मुद्दों को संसद में उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जनहित के मुद्दों पर बोलने से पार्टी को क्या नुकसान हुआ और उन्हें बोलने से क्यों रोका गया।
इस विवाद में मुख्यमंत्री भगवंत मान की क्या भूमिका है?
सीएम भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से राघव चड्ढा पर "कॉम्प्रोमाइज्ड" होने का आरोप लगाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और चड्ढा के बीच विश्वास की भारी कमी आ चुकी है।
राघव चड्ढा की जगह अब कौन डिप्टी लीडर है?
पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया डिप्टी लीडर नियुक्त किया है। यह बदलाव अप्रैल 2026 की शुरुआत में किया गया, जिसके बाद से पार्टी के भीतर यह विवाद और गहरा गया है।