हिंदी मजेदार पहेलियां

मुझ में रहता लगातार
हवा का आना जाना
हो जाये मुझ में प्रॉब्लम
तो काम मेरा पानी बहाना
कभी कभी तो निकालूँ आवाज
मुझ पे करता है मानव नाज

उत्तर – नाक / नासिका

ताज के नीचे राज चाय का
दबा सूट में संत फ़क़ीर।
दमदार आवाज में रख जायका
खींचे भारत की भाग्य लकीर।।

उत्तर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

फुदक फुदक के उडूं गगन
फूल सा नाजुक मेरा बदन
रंगीन सुगन्धित मेरा जीवन
जरा याद करो अपना बचपन

उत्तर – तितली

हिंदी मजेदार पहेलियां

ये वीर ऐसे हैं मानों तीर
आग रखते हैं मेरे वीर
वीर रहे मेरे तरकश में
सारे संग चले मैं मरघट में
मेरी कमान संग भीगे तरकश
वीर सूखने पर काम आये बस

उत्तर – माचिस

ढूंढता तुझे नौजवान
क्योंकि तु है मुकाम
जो दे उसे पहचान
तेरे नाम से उसका नाम

उत्तर – काम / रोजगार

बांध के मेरी टाँगे
कब तक नचाओगे
मैं रुका तो तुम नमकीन
पानी से नहाओगे

जवाब – पंखा

दास बनाके तुमको रखता, तुम सोचो तुम उसको रखता।
प्यार से लेकर चप्पल मिलता, ना हो साथ दिल बड़ा मचलता।।

उत्तर – मोबाइल

सम्पति का छोटा पैकेट
कोई उड़ा ना ले
सो प्लीज चेक इट
वरना ढूंढते रहोगे
कहाँ गिरा किधर से उड़ा
पूछ पूछ के टटोलते रहोगे

उत्तर – पर्स / बटवा

हूँ तो बड़ा ही छोटा, पर सब कुछ खोल के रख दूँ।
हो पतला, छोटा या मोटा, सब को पकड़ के रख लूँ।।
कर दूँ तेरा सीना-छाती लॉक।
खो जाऊं तो लग जाए शॉक।।

उत्तर – कुर्ती या शर्ट का बटन

तेरा अक्स मुझ में बसा है
देख सुन्दर या बदसूरत फंसा है
हूँ तेरे किसी लम्हे का पिटारा
आज के लम्हे में लगूंगा प्यारा

उत्तर – तस्वीर / फोटो

एक कली दो कली लो चली लो चली
घूमूं तुम्हारे घर में, मैं देखो गली गली
होकर भोजन की चाह में पगली
लाइट के नीचे मेरी किस्मत निकली

उत्तर – छिपकली

हो तुम्हारे सीने में कैद
संभालता हूँ तेरे इमोशन
लव सॉन्ग करे मुझ से मोशन
मैं ही होता हूँ सबसे खुश
मेरा ही होता हमेशा शोषण

जवाब – दिल

 

रगड़ा तुमने प्रेम से
मेरा खुशबूदार बदन
धीरे धीरे कर दिया जी
समाप्त मेरा जीवन
किन्तु रसायन कर गए
जाते जाते तुमको पाक
देख लो रहा तो नहीं दाग

उत्तर – साबुन

बड़े ही दूर से आये हैं
तुम्हारे शरीर में समायें हैं।
फिर एक दिन आप हो कलश जितना
हम में समाये हैं।।

उत्तर – पानी या जल

गर्म गर्म कपड़ों पर करम
कर रहे हो मुझे ज्यादा गरम
तो प्लीज कर लो थोड़ा रहम
वरना जला गलती से पिछवाड़ा
तो आएगी पहनने में शर्म

उत्तर – इस्त्री | प्रेस

हूँ बड़ा ही भैय्या जी मैं तीखा
लगा जो सीने में जोर से चीखा
मैं नहीं तुम्हारा मुखड़ा
सुनाते फिरोगे दुखड़ा
ले गया जान छोटा सा
लोहे का धारधार टुकड़ा

जवाब – चाकू / कटार

हूँ काल की दासी , तेरे रक्त की हूँ मैं प्यासी।
रह कई दिन अज्ञातवास में, निकलूं बनके विनाशी।।

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