अकबर बीरबल के मशहूर किस्से

अकबर बीरबल किस्सा – मनहूस सूरत

वो सुबह बड़ी ही अलसाई हुई थी। अकबर बादशाह बिस्तर पर देर तक सो रहे थे तब ही अचानक उनकी आँखे खुली और उन्हें बड़ी ही जबरदस्त प्यास लगी। बादशाह अकबर पानी के लिए पुकारने लगे।

अकबर की यह आवाज किसी व्यक्ति को सुनाई नहीं दी। सिवाय एक सफाई कर्मचारी के। जब बादशाह की बारबार पुकार सुनी तो वह सफाई कर्मचारी अकबर बादशाह के लिए पानी लेकर पहुँच गया। अकबर बादशाह को बड़ी जबरदस्त प्यास लगी थी तो यह सोचे और जाने बिना कि यह पानी कौन लेकर आया है। बादशा ने पानी पी लिया।

Akbar Birbal Ki Kahani,

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi

इतनी ही देर में बादशाह के पास उनके खास सेवक भी दौड़कर आये। उन्होंने देखा की सफाई कर्मचारी राजा के समीप खड़ा है अतः उससे दुत्कारते हुए तुरंत उसे वहां से चले जाने को सेवकों ने कहा। दिन होते होते बादशाह की तबियत खराब हो गई। उनको दस्त लग गए। राजा जी बार बार पेट पकड़कर पॉटी जाने लगे।

बादशाह की खराब सेहत देखते हुए राजवैद्य व हकीम वहां पहुंचे और राजा के उपचार के लिए दवाईयां दी। बादशाह ने अचानक अपनी तबियत खराब होने का कारण पहुंचा। तो वजीर अब्दुल्ला ने इसका कारण सुबह सुबह किसी मनहूस सूरत का देखना बताया। बादशाह के ख़ास सेवकों ने भी हां भरते हुए कहाँ कि वजीर का कथन सत्य है आपने आज सुबह सबसे पहले एक छोटी जाति के सफाई कर्मचारी का चेहरा देखा अवशय ही आपकी तबियत के पीछे उसकी मनहूस सूरत है।

बादशाह ने इस विषय पर गौर किया और उनके मन में यह बात बैठ गई। कि उसके स्वास्थ्य के ख़राब होने के पीछे उस व्यक्ति की मनहूस सूरत ही है जिसने आज सुबह उसको पानी पिलाया था। बादशाह ने सोचा ऐसा मनहूस व्यक्ति में मेरे महल में तो क्या इस राज्य में भी नहीं रहना चाहिए। यही नहीं यह व्यक्ति जहाँ भी जायेगा अपनी मनहूसियत साथ में लेकर जायेगा।

सांयकाल को अकबर बादशाह का दरबार लगा। अकबर ने उस सफाई कर्मचारी को दरबार में बुलाने को कहा साथ में यह भी कहा कि उस सफाई कर्मचारी का चेहरा ढककर उसे दरबार में लाया जाए। कुछ देर बार उस सफाई कर्मचारी का चेहरा ढककर उसे दरबार में प्रस्तुत किया गया।

बादशाह अकबर ने कहा यह व्यक्ति ना केवल हमारे लिए बल्कि इस राज्य के लिए भी बहुत मनहूस है। क्योंकि आज इस व्यक्ति का चेहरा देखने भर मात्र से हम बीमार हो गए। ऐसा व्यक्ति जहाँ भी जायेगा वह अपनी मनहूसियत साथ लेकर जायेगा। अतः आदेश दिया जाता है कि इस व्यक्ति को तुरंत फांसी की सजा दी जाए।

बादशाह का आदेश सुनकर वह सफाई कर्मचारी फफक फफक कर रोने लगा और बादशाह से रहम की गुहार लगाने लगा। किन्तु बादशाह अपना आदेश सूना चुके थे और वह उस व्यक्ति से बहुत नाराज थे।

तब ही अचानक गुस्ताखी माफ़ हो हुए बीरबल अपने स्थान से खड़े हुए। बीरबल बोले महाराज मैं इस मनहूस चेहरे को एक बार जरूर देखना चाहूंगा। बादशाह सुनकर हैरान हुए। और बोले नहीं बीरबल तुम्हारा भी स्वास्थ्य खराब हो जायेगा।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से

अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Ki Kahani

तब ही बीरबल आगे बढे और उस व्यक्ति को गले लगाया शांत हो जाओ। इसके बाद बीरबल बोले महाराज जब आप सुबह उठे तो आपके आस पास आपका कोई सेवादार नहीं था। आपकी परेशानी देख यह युवक बिना यह सोचे समझे की वह निम्न श्रेणी का है आपके लिए पानी लेकर जाता है क्योंकि हो सकता था कि यदि आपको पानी नहीं मिलता तो शायद आपका स्वास्थ्य और भी ज्यादा खराब हो जाता।

यदि गौर करें तो सुबह सुबह आपने इसका मनहूस चेहरा देखा और आपको बिमारी मिली। और दूसरी तरह यह भी है कि इसने भी आपका चेहरा देखा और इसे मौत मिली। तो बताइये महाराज आप दोनों में से ज्यादा मनहूस कौन है।

यह सुनते ही बादशाह समेत सारा दरबार जोर जोर से ठहाके लगाकर हँसने लगा। बादशाह को अपनी अज्ञानता का अहसास हुआ। वह उस व्यक्ति की
कृतज्ञता को मानने की बजाय उसे फांसी देने जा रहे थे।

बादशाह अकबर ने उस व्यक्ति से अपना नाकाब हटाने को कहा और राजा से उसे 500 अशर्फियाँ तोहफे में दी। बादशाह बोले बीरबल आज का दिन बड़ा ही शुभ है आज मुझे यह अहसास हुआ कि कोई व्यक्ति किसी के लिए मनहूस नहीं होता। इस बात का मुझे ज्ञान हुआ। यह मेरे लिए बड़ी बात है। ना यह व्यक्ति मेरे लिए मनहूस है क्योंकि इसकी वजह से मुझे यह अहसास हुआ। और ना मैं मनहूस हूँ देखो आज मेरे चेहरा देखने से ही इसे 500 अशर्फियाँ उपहार में मिली।

बादशाह की बात सुनकर एक बार फिर सारा का सारा दरबार खिलखिलाकर हंसने लगा।

Akbar Birbal Story in Hindi – फ़ारसी व्यापारी

एक ईरानी व्यापारी अकबर के दरबार में आता है तथा शिकायत करता है कि उसके साथ बादशाह के राज्य में धोखा किया गया है। बादशाह के पूछने पर ईरानी व्यापारी ने बताया। कि वह एक सौदागर है उसका नाम गुलफाम है और वह ईरान से कीमती वस्तुएं बर्तन, कालीन इत्यादि लाकर भारत में उनको बेचता है। किन्तु भारत के एक चालबाज व्यापारी जिसका नाम शेरशाह है उसने धोखे से उसके सारे सामान पर कब्जा जमा लिया।

बादशाह ने सुनते ही सबसे पहले शेरशाह को ढूंढकर दरबार में प्रस्तुत करने को कहा। अकबर का हुक्म सुनते है मंत्री व दो सैनिक शेरशाह को लाने के लिए वहां से प्रस्थान कर गए। बादशाह ने कहा कि गुलफाम उसे पूरी घटना विस्तार से बताये।

गुलफाम ने बताया कि मैं ईरान से अपनी वस्तुओं के साथ भारत आ रहा था। मैं ईरान से कीमती कालीन व बर्तन लाकर भारत में बेचता हूँ और अपनी आजीविका चलाता हूँ। रास्ते में मुझे शेरशाह मिला। शेरशाह भारत का एक व्यापारी है। शेरशाह भारत से सुगंधित मसाले ईरान में बेचकर लौट रहा था। उसके पास दो गधे थे।

अकबर बीरबल मशहूर कहानी

अकबर बीरबल स्टोरी | Akbar Birbal Ke Kisse

मुझे पैदल सिर पर सामान लादे देख शेरशाह ने मुझ से कहा कि मैं अपने सामानों को उसके गधों पर लाद दूँ ताकि मेरे सिर का बोझ कम हो जायेगा। मैं ने उसे नेक इंसान समझते हुए अपने सामान उसके गधे पर लाद दिए। और दोनों साथ साथ हंसी ख़ुशी बात करते करते भारत की और आने लगे।

किन्तु जब हम आगरा पहुंचे और मैं अपने सामानों को गधों पर से उतारने लगा तो उसने मुझे मेरे सामानों को छूने भी नहीं दिया। साथ ही अपने परिचित लोगों की भीड़ जमा कर ली। और सबके सामने उसने मेरा सारा सामान उसका बताया। उसने सब से कहा कि यह सब सामान उसका है और वह इनको ईरान से खरीद कर लौट रहा है।

वहां सभी व्यक्ति उसके परिचित थे मेरी किसी ने नहीं सुनी। सब उसी का पक्ष ले रहे थे। सो अब एक आशा के साथ मैं आपके पास आया हूँ मेरे साथ न्याय करे बादशाह। मेरे पास अब कोई धन शेष नहीं है मुझे अपनी पत्नी और बच्चों के पास जाना है रास्ते में खाने की जरूरतों का पैसा भी नहीं है। मेरे पीड़ा को समझिये बादशाह।

गुलफाम कहकर शांत ही हुआ था कि सैनिक शेरशाह के साथ दरबार में प्रस्तुत हुआ। और शेरशाह ने बादशाह अकबर को विनम्रता पूर्वक झुककर सलाम किया। साथ ही एक भेंट स्वीकार करने को भी कहा जो वह उसकी तरफ से बादशाह के लिए लाया था।

बादशाह अकबर ने वह भेंट अस्वीकार करते हुए कहा कि पहले वह गुलफाम के लगाए आरोप को बताये कि वह कितना सच्च है। अब शेरशाह की बार थी। बादशाह अकबर ने बताया कि गुलफाम के द्वारा उस पर धोखधडी के आरोप है। और सारी बात शेरशाह से कही गई। इस पर शेरशाह बोला कि गुलफाम के आरोप सरासर झूठ है।

शेरशाह ने बताया महाराज यह बात सच है कि मैं और गुलफाम साथ साथ ही ईरान से लौटे थे। मैं भी कुछ कीमती कालीन व बर्तनों के साथ ईरान से लौटा तो गुलफाम भी अपने साथ कुछ सामन लाया था ताकि वह भारत में बेच सके। किन्तु रास्ते में जब हम लौट रहे थे गुलफाम बेफिक्र रूप से रात को सोया और इसका सामान कुछ चोर लेकर भाग गए। वहीँ मेरे समय पर जाग जाने से मैं ने अपने माल को चोरों के हाथ लगने से बचा लिया।

इस घटना के बाद गुलफाम ने मुझ पर वहां भी आरोप लगाया कि इस चोरी में मेरा हाथ है जब मैंने मना कर दिया और तो यह इसने मुझे आपके द्वारा सजा का भय दिखाया और मेरा माल जो मैं ईरान से लाया था उसके बंटवारे की मांग करने लगा। किन्तु मैं बिना किसी भय के अडिग रहा और इसके साथ किसी भी प्रकार का बंटवारा करने से मना कर दिया।

अकबर बीरबल कहानी – Farasi Vyapari

महाराज ना तो चोरी में मेरा कोई हाथ है ना ही मैं इसे अपना ईरान से लाया हुआ माल वापस दे सकता हूँ आप चाहे तो मेरे नौकरों से पूछ लीजिये। मैं उनसे कहकर गया था कि जब मैं ईरान से मसाले बेचकर लौटूंगा तो साथ में कीमती कालीन और बर्तन लेकर आऊंगा। आप मेरी निष्ठा ईमानदारी के बारे में किसी से भी पूछ सकते हैं।

अकबर बीरबल स्टोरी

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi

सरासर झूठ महाराज ! शेरशाह बिलकुल झूठ बोल रहा है। गुलफाम ने विरोध करते हुए कहा। बादशाह अकबर के अब कुछ समझ नहीं आ रहा था की कौन सही है और कौन गलत। यहाँ से वे दोनों ही भले मनुष्य जान पड़ रहे थे। अतः बादशाह ने कहा शेरशाह तुम अपने घर जाओ और ध्यान रहे जब तक इस वाद पर न्याय नहीं हो जाता तुम यह शहर छोड़कर कहीं नहीं जाओगे।

और गुलफाम तुम हमारे मेहमान कक्ष में मेहमान बनकर रहोगे। यदि तुम्हारा आरोप सच निकला तो तुम्हे न्याय अवश्य मिलेगा वरना मेरे राज्य को और मेरी जनता को बदनाम करने के आरोप में गंभीर सजा के लिए पूरी तरह तैयार रहो। गुलफाम ने बादशाह का आदेश मानते हुआ कहा जैसा हुकुम महाराज।

अब अकबर ने बीरबल से पुछा – प्रिय बीरबल मेरे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कौन यहाँ झूठा है और कौन सच्चा। अब तुम्ही मेरी कुछ मदद करो। बीरबल ने कहा जैसी आपकी इच्छा महाराज मैं आपकी इस समस्या को सुलझाने में पूर्ण रूप से मदद करूँगा। मैं जल्द ही आपके सामने सच और झूठ का पर्दापाश कर दूंगा। मुझे आप कल तक का समय दीजिए।

दूसरे दिन बादशाह का दरबार लगा सभी मंत्री गण व नवरत्न वहां इकट्ठा हुए। बादशाह ने आदेश दिया की शेरशाह व गुलफाम को दरबार में प्रस्तुत किया जाए। कुछ देर बाद शेरशाह व गुलफाम भी बादशाह के सामने प्रस्तुत होते हैं। फिर बादशाह शुरुआत करते हुए कहते हैं। हाँ तो बीरबल पता चला कि कौन सच्चा है है और कौन झूठा।

बीरबल ने कहा हाँ महाराज मैं पता लगा लिया गुलफाम यहाँ सच्चा है और शेरशाह झूठ बोल रहा है। यह कहते हैं शेरशाह विरोध करने लगा और बोला यह आप कैसे कह सकते हैं राजा बीरबल। शेरशाह भय से काँप रहा था।

बादशाह ने आगे पूछते हुए कहा यह आप कैसे कह सकते हैं बीरबल कि शेरशाह झूठा है। इस पर बीरबल ने जवाब दिया। महाराज जब आपने मुझ से इस मसले का दूध का दूध और पानी का पानी करने को कहा तो मैं सबसे पहले उस रात अतिथि कक्ष में गुलफाम से मिलने गया। यह बड़ा ही चिंतित और उदास झरोखे से बाहर देख रहा था।

मेरे पूछने पर गुलफाम ने बताया कि उसने वहां से एक कालीन 50 अशर्फी में खरीदता है और यहाँ हिंदुस्तान लाकर उसे 100 अशर्फी में बेचता है। इस प्रकार उसका यहाँ से आने जाने का खर्चा और मुनाफा वह कमा लेता है। मैं इसके अतिरिक्त ईरानी बर्तनों की खासियत उनकी भी खरीदने व बेचने की दर साथ मैं जानी।

बीरबल आगे बताता है दूसरे दिन मैं सुबह शेरशाह के नौकर से मिला और मैं एक ग्राहक के रूप में उसके पास गया और साथ ही उससे दोस्ती भी की। मैं उससे बातों ही बातों में जाना कि इससे पहले शेरशाह कभी ईरानी वस्तुएं वहां से यहाँ लेकर नहीं आये ये केवल भारतीय मसालों को वहां बेचकर मस्ती मारते हुए भारत आते थे। इस दौरान यह कुछ वेश्यालाओं में रुकते। साथ बीच में कुछ मयखानों में भी अपनी राते गुजारते।

बीरबल ने आगे बताया फिर वह ग्राहक के तौर पर शेरशाह से मिला इस दौरान बीरबल ने अपना वेश बदला हुआ था वह एक सामान्य नागरिक था। उसने सबसे पहले एक कालीन का भाव करवाया। भाव तौल करने पर शेरशाह 50 अशर्फी में एक कालीन के लिए तैयार हो गया। किन्तु फिर जब मैं ने शेरशाह से कहा कहा कि मुझे तो 25 कालीन चाहिए और यह मुझे वह 30 अशर्फी में दे तो भी शेरशाह तैयार था।

मतलब साफ़ है महाराज जरा सोचिये कोई सौदागर जो विदेश से किसी चीज को 50 अशर्फी में लाये और यहाँ आकर वह उसे उससे भी कम दाम 30 अशर्फी में क्यों देगा। यही नहीं महाराज मैं ने जब शेरशाह की पूरी कुंडली निकाली तो पता चला कि शेरशाह एक अय्याश प्रवृति का धोखेबाज सौदागर है। यह अपने ऐसे ही कुछ साथियों के साथ अय्याशी करता है जो सदा इसका पक्ष लेते हैं।

अब अकबर बादशाह के सामने पूरी तस्वीर सामने थी। शेरशाह बादशाह से रहम की भीख माँगने लगा। किन्तु बादशाह ने कोई रहम ना दिखाते हुए यह आदेश दिया कि शेरशाह तुरंत उसे उसका सारा माल वापिस करे। साथ ही शेरशाह की आधी से ज्यादा सम्पति को शाही कोष में शामिल लिया गया। तथा गुलफाम को 5000 अशर्फियाँ जो उसे बादशाह के राज्य में तकलीफ हुए उसके बदले में दी गई।

Akbar Birbal Story in Hindi – मूर्ख लोगों की खोज

एक दिन सुबह सुबह दरबार लगा तो बादशाह ने राजा बीरबल को बुलाया और कहा बीरबल तुम्हारी बुद्धि के हम प्रशंसक है और तुम्हारी ही नहीं मेरे इस दरबार में विराजमान सभी लोग बहुत बुद्धिमान है चाहे मेरे ये नवरत्न हो या फिर मेरे अन्य मंत्री सभी अपने तर्कों और वाकचातुर्य से अपना दीवाना बना देते हैं। एक बादशाह होने के कारण में हमेशा बुद्धिजीवी लोगों से घिरा रहता हूँ।

सच कहूँ बीरबल तो मैं इन बुद्धिजीवियों से ऊब गया हूँ। अतः मेरी इच्छा है कि मैं कुछ मूर्ख व्यक्तियों से मिलूं। मुझे विश्वास है कि तुम ही मेरी यह इच्छा पूरी कर सकते हो। ऐसे 6 महामूर्ख व्यक्तियों से मुझे मिलवाओ। जो लगे कि हाँ ये वास्तव में मेरे राज्य के सबसे बड़े पागल है। बादशाह की ऐसे इच्छा सुनते ही सारा दरबार जोर जोर के ठहाके लगाकर हंसने लगा।

बीरबल ने प्रणाम करते हुए कहा जैसी आपकी इच्छा महाराज मैं आपका यही अभिलाषा अवश्य पूर्ण करूँगा बस आप मुझे कुछ दिन का समय दीजिए। अकबर ने कहा ठीक है बीरबल छः मूर्ख व्यक्तियों को ढूंढने के लिए मैं तुमको छः दिन का समय देता हूँ। पर तुम इनसे मुझे मिलाओ। मुझे इनसे मिलने की बड़ी अभिलाषा है।

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Akbar Birbal story in Hindi

अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Ki Kahani

बीरबल उसी वक्त घोड़े पे सवार होकर महल से शहर की ओर मूर्खों की तलाश में निकल गया। साथ में बीरबल मन ही मन यह भी सोच रहा था कि महाराज ने यह कैसा मूर्खता भरा कार्य मुझे सौंपा है। आज बीरबल को अपने बुद्धिमान होने पर हंसी आ रही थी। उसे इससे ज्यादा बेवकूफी भरा कार्य अपने जीवन कभी नहीं किया। पर खैर जो भी था उसे अपने बादशाह की इच्छा को पूरा करना था वह भी तय समय पर।

उसे रास्ते मैं एक ऐसा व्यक्ति मिला जो गधे पर बैठा हुआ था और सिर पर चारा रखे हुए था। उस व्यक्ति को देखकर ही बीरबल की हंसी फुट पड़ी। बीरबल ने उस व्यक्ति को रोका और पुछा है। अरे महोदय, क्या आप मुझे बताएँगे कि आपने चारे को अपने सर पर क्यों लाद रखा है। आप चारे को आपकी ही तरह आपके गधे पर भी रख सकते हैं।

इस पर उस व्यक्ति ने कहा आप ने बड़ा ही बुद्धिमता भरा सवाल पुछा श्री मान। दरअसल मैं आपको बता दूँ कि मैं जानवरों से बहुत प्रेम करता हूँ उनको पीड़ा में देखकर मुझे भी बड़ी पीड़ा होती है अतः मैंने इस चारे का गट्ठर को अपने सिर पर रखा है ताकि इस पर ज्यादा बोझ ना पड़े।

उस व्यक्ति का जवाब सुनकर बीरबल मन ही मन खूब हंसा। उसे विश्वास हो गया कि वाकई मुझे अपना पहला मूर्ख व्यक्ति मिल गया है। बीरबल ने कहा बहुत अच्छा मित्र। तुम्हारा नाम क्या है ? मेरा नाम भोलू है उस व्यक्ति ने जवाब दिया।

भोलू मुझे तुम्हारे इस दयाभाव से बड़ी ही प्रसन्नता हुई। किन्तु और भी ज्यादा प्रसन्नता तब होगी जब तुम्हे मैं बादशाह से तुम्हारी इस उदार भावना के लिए तुमको ईनाम दिलवाऊंगा। ईनाम की बात सुनते ही भोलू प्रसन्न हो गया। और बीरबल के साथ चलने को तैयार हो गया।

अकबर बीरबल मशहूर किस्सा – Look For Fools

बिरबल फिर से दूसरे मूर्ख की तलाश में जुट गया तब ही उसे दो व्यक्ति झगड़ते दिखाई दिए। बीरबल ने पुछा कौन हो तुम लोग और आपस में क्यों झगड़ रहे हो। तो उन्होंने बताया कि वो चटकु और मटकु है। मटकू ने शिकायत भरे लहजे में कहा जनाब यह चटकू मेरी गाय के ऊपर इसका शेर छोड़ना चाहता है। बीरबल ने आस पास देखा ना तो वहां कोई गाय थी नाही कोई शेर।

कहाँ है तुम्हारी गाय मटकू और कहाँ है तुम्हारा शेर चटकू। इस पर चटकू ने जवाब दिया। जनाब यह तो हमें पूजा करने पर भगवान से वरदान में मिलेंगे। तब मैं अपना शेर इसकी गाय पर छोडूंगा। जवाब सुनते ही एकबार फिर बीरबल मन ही मन हंसा और समझ गया कि उसे उसका दूसरा और तीसरा मूर्ख मिल गया।

बीरबल ने कहा हम्म्म्म …. वाकई समस्या गंभीर है तुम्हारा फैसला तो केवल बादशाह ही कर सकते हैं। चलो मेरे साथ बादशाह से तुम दोनों की समस्या का समाधान करवाते हैं। और समस्या के समाधान के लिए चटकू और मटकू दोनों बीरबल के साथ हो गए।

बीरबल फिर चौथे मूर्ख व्यक्ति की तलाश में निकला और आगे जाने पर उसने एक व्यक्ति को देखा जो चांदनी की रौशनी में बड़ी बड़ी घास के बीच में कुछ ढूंढ रहा था। बीरबल ने पुछा क्या तलाश कर रहे हो युवक। उस युवक ने कहा जनाब मेरे सोने की मुद्रिका खो गई है। मैं उसे ही ढूंढ रहा हूँ। बीरबल ने पुछा तुम्हारी मुद्रिका कब खोई।

इस पर उस युवक ने जवाब दिया अभी कुछ देर पहले वहां उस पेड़ के नीचे मेरी मुद्रिका खो गई। किन्तु वहां घोर अँधेरा होने से मैं उसे यहाँ ढूंढ रहा हूँ। बीरबल फिर इसके जवाब पर मन ही मन हंसा।

बीरबल ने कहा कोई बात नहीं मित्र हो सकता है जिस मुद्रिका को तुम यहाँ ढूंढ रहे हो। संभव है कि वह बादशाह के पास मिल जाये। मैं ने अभी कुछ देर पहले ही उनके पास बहुत सारी मुद्रिका देखि। यह प्रस्ताव सुनकर वह युवक खुश हो गया और राजा के साथ चलने को तैयार हो गया।

दूसरे दिन बादशाह का दरबार लगा। बीरबल उन चारों मूर्खों के साथ दरबार में प्रस्तुत हुआ और बादशाह का प्रणाम करते हुए कहता है महाराज आपकी आज्ञा अनुसार मैं उन सभी छः मूर्ख व्यक्तियों को ढूंढ लिया है। बादशाह बीरबल की बात सुनते ही आश्चर्य से भर पड़े। क्या बात है बीरबल जी। मैं तो छः दिन का समय दिया था आपने एक ही दिन में यह कार्य कर दिखाया।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal ki Kahani

जी महाराज मुझे कल ही यह सभी छ मूर्ख मिल गए। बीरबल ने जवाब दिया। अच्छा तो बीरबल मुझे आपके इन छः मूर्खों से मिलवाइए। जैसे आदेश महाराज मेरा पहला मूर्ख है यह भोलू। और फिर भोलू के बारे में बताया। राज बीरबल भोलू के भोलूपन और मूर्खता को देख बड़े प्रसन्न हुए। उसके बार बीरबल ने उसी प्रकार से चटकु मटकु और जुगनू की मूर्खता से भी बादशाह को मिलवाया और उनके बारे में भी बताया।

चारों मूर्ख व्यक्ति से मिलने के बाद बादशाह ने कहा बीरबल यह तो केवल चार ही मूर्ख हुए मैं तो तुमसे छ मूर्ख ढूंढकर लाने को कहा था। बीरबल ने कहा हाँ महाराज आपका 5 वां मूर्ख आपके सामने खड़ा है उसका नाम बीरबल है जो आपकी मूर्खता भरी इच्छा के लिए इन मूर्खों को ढूंढने गया। यह सुनते ही बादशाह अकबर समेत सारा दरबार हंसी और ठहाकों से गूंज उठा।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

बीरबल तुम्हारे जवाब से अब छटे व्यक्ति पर मुझे पहले से ही शंका हो रही है। बादशाह ने कहा। हाँ महाराज आपका शंका सही है। छटे सबसे बड़े मूर्ख मेरे सामने बैठे है जो बादशाह अकबर जिनको मूर्ख व्यक्तियों से मिलने की मूर्खता भरी इच्छा हुई। ऐसा कहते हैं सारा सदन ठहाकों से गूंज उठा।

Akbar Birbal ki Kahani – एक शेर माँस

एक बार सीताराम शहर में अपने दोस्त रामकरण के पास जाता है। और उससे कहता है मित्र मुझे 500 रुपये की आवश्यकता है। रामकरण व्यापारी था वह लोगों को उधार दिया करता था। रामकरण ने पुछा मित्र इतने रुपये की तुम्हे आवश्यकता क्यों है। तो सीताराम ने कहा मेरे घर में कुछ दिनों पहले चोरी हो गई मित्र इसमें बहुत सा धन व्यापार का था जो मैंने लोगों से लिया था। यदि मुझे समय पर पैसा मिला तो मेरा व्यापर भी चौपट हो जायेगा और बहुत से कर्जदार भी बाद जायेंगे।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से

अकबर बीरबल स्टोरी | Akbar Birbal Ki Kahaniyan

रामकरण ने कहा अच्छा मित्र इतना धन तो मेरे पास नहीं है हाँ पर मेरे शहर में एक व्यापारी है सुन्दर सिंह उससे मैं तुमको यह धन दिलवा सकता हूँ। मैं 200 रुपये तुमको देता हूँ और 300 रूपये तुम्हे सुन्दर सिंह से दिलवा देता हूँ। सीताराम ने कहा जैसे तुम्हारी इच्छा मित्र। फिर दोनों दोस्त सुन्दर सिंह के पास चले जाते हैं।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

सुन्दर सिंह कहता है कि मैं तुमको जानता हूँ रामकरण तुम्हारे दोस्त को नहीं इसलिए यह 300 रूपये तुम मुझे चुकाओगे। वह भी एक निश्चित तारीख पर। यदि उस दिन या उससे पहले तुम मुझे यह रूपये नहीं दे पाते हो तो मैं तुम्हारे शरीर से से एक शेर माँस (अर्थात एक किलो माँस ) काटूंगा। क्या तुम्हे यह मंजूर है।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Ki Kahani

नहीं नहीं हमें यह शर्त मंजूर नहीं है सीताराम ने कहा चाहो तो तुम ब्याज थोड़ा ज्यादा लगा लो। लेकिन सुन्दर सिंह ने मना कर दिया नहीं शर्त यही रहेगी यदि तुम्हे मंजुर हो तो 300 रूपये ले जाओ।

रामकरण अपने मित्र सीताराम से थोड़ी देर मंत्रणा करता है। और उससे यह जानता है कि क्या निश्चित समय पर वह यह राशि चुकाने में सक्षम है। सीताराम ने कहा हाँ रूपये तो वह निश्चित रूप से चूका देगा किन्तु यह शर्त बड़ी ही अमानवीय है। इस पर राम करण कहता है तुम चिंता मत करो मित्र अभी तुम्हे धन की सख्त जरूरत है और मांस तो वह तब काटेगा जब हम उसके पैसे अदा नहीं करेंगे।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

रामकरण अपने मित्र से मंत्रणा करने के बाद सुन्दर सिंह से कहता है सुन्दर सिंह हमें तुम्हारी शर्त मंजूर है। लो अपने कागजात तैयार करो शर्त के अनुसार मेरे दोस्त को 300 रूपये कर कर्ज दो। सुन्दर सिंह ने मुस्कान भरी और अपने कागजात तैयार करने के बाद सीताराम को 300 रूपये का कर्ज दिया।

कुछ दिनों बाद राम करण की भी आर्थिक हालत ख़राब हो जाती है उसे व्यापार में बड़ा नुकसान हो जाता है तब ही वह दिन आ जाता है जिस दिन या उससे पहले राम करण और सीताराम को सुन्दर सिंह के 300 रूपये लौटाने थे। सुन्दर सिंह अपने कुछ साथियों के साथ राम करण के घर आता है और उसे बाहर से आवाज देता है।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

रामकरण उसे बाहर देखते ही चौंक उठता है वह समझ गया था कि सुन्दर सिंह अपने पैसे लेने आया है। रामकरण आज के दिन तुम्हारे मित्र से मुझे मेरे पैसे ब्याज सहित चुकाने को कहा था कहाँ है मेरा धन जो तुमने मुझ से लिया था। राम करण कहता है सुन्दर मैं उसे सूचना भिजवा चूका है वह जल्दी ही तुम्हारे धन के साथ यहाँ आएगा। अवश्य ही किसी कारण से उसे देर हो गई होगी।

सुन्दर सिंह बोला राम करण मैं तुम्हारे जैसे बईमान लोगों को बड़े ही अच्छे से जानता हूँ तुम मुझे मेरा धन नहीं लौटाने वाले हो। यह सब तुम्हारे बहानेबाजी मैं नहीं जानता मुझे मेरा धन नहीं चाहिए अभी इसी वक्त। यदि तुम मुझे मेरा धन नहीं दे सकते हो तो अपना एक शेर मांस देने के लिए तैयार हो जाओ।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

राम करण सुन्दर सिंह के आगे रहम की भीख मांगने लगा। कि वह उस पर रहम करे उसका मित्र आते ही वह उसके सारे पैसे लौटा देगा। किन्तु सुन्दर सिंह बहुत गुस्से में था। वह उसका का एक शेर मांस काटने पर उतारू था। तब ही वहां से राजा के सैनिक गुजर रहे थे यह हंगामा देख वे वहां रुक गये और दोनों को बादशाह अकबर के दरबार में लेकर आ गए।

बादशाह अकबर ने उन दोनों की बात सुनी और फिर सुन्दर सिंह से कहा सुन्दर यह ठीक है कि तुमने इस शर्त पर इसे धन दिया था कि वह बदले में एक शेर मांस काटने को देगा यदि वह समय पर पैसे नहीं चुका पाया। किन्तु यह बहुत ही अमानवीय तरीका है सुन्दर। तुम थोड़ा इन्तजार और कर लीजिये।

अकबर बीरबल स्टोरी – 1 Sher Maas

सुन्दर ने जवाब दिया महाराज आप तो राजा है आपका आदेश तो हर किसी को मानना पड़ता है किन्तु क्या यह व्यापार की शर्तों का उल्लंघन नहीं होगा। यदि आज राम करण मुझे अपने शरीर से एक शेर मांस काटने नहीं देता है तो यह व्यापार जगत में एक अविश्वसनीयता पैदा करेगा और फिर कोई किसी को धन देने से बचेगा।

अब अकबर को सुन्दर सिंह को समझाना मुश्किल लग रहा था वह अपनी शर्त पर कायम था। ऐसा देखते हुए बीरबल से बादशाह बोले अब बीरबल तुम ही इस मसले को सुलझाओ। इस पर बीरबल अपने स्थान से खड़े हुए और अपनी तलवार निकाली।

महाराज इस में मामला सुलझाना क्या है यह तो सुलझ चूका है यह लो सुन्दर यह तलवार लो और राम करण का एक शेर मांस शरीर से काट लो। बीरबल का यह कथन सुनते ही सब चौंक खड़े हुए।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

बीरबल आगे बोले किन्तु ध्यान रहे सुन्दर तुम्हे एक किलो मांस ही काटना है। एक किलो से थोड़ा भी ज्यादा नहीं होना चाहिए और ना ही थोड़ा कम। और सबसे बात तुम एक बूँद भी खून नहीं गिराओगे। क्योंकि तुमने मांस की बात की है खून की नहीं। और यह भी ध्यान रहे कि राम करण की जान नहीं लोगे क्योंकि तुम एक किलो मांस ले सकते हो किन्तु राम करण की जान नहीं ले सकते। ये तीनों बातें तुम्हारी शर्त के अंदर नहीं आती है। यदि तुम्हे मंजूर हो तो तुम इसी वक्त मांस काट लो।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

अब सभी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी सुन्दर का चेहरा शर्म से नीचे झुका हुआ था राम करण भी गदगद हो रहा था। वाकई सुन्दर सिंह पर न्याय की यह तीन शर्ते बड़ी ही भारी थी। बादशाह अकबर ने कहा क्या सुन्दर क्या हुआ तुम अब पीछे क्यों हट रहे हो यदि तुम इन शर्तों के साथ इसका मांस नहीं काट सकते हो तो तुम्हे 5000 रुपये हर्जाने के रूप में राम करण को देने होंगे और यदि तुम मांस काटते हो और बीरबल की बताई शर्तों का उल्लंघन होता है तो फांसी के लिए तैयार हो जाओ।

यह सुनते ही सुन्दर गिड़गिड़ाते हुए अकबर से रहम की भीख मांगने लगा और 1000 हर्जाने के तौर पर राम करण को दिए।

अकबर बीरबल मशहूर कहानी – स्वर्ग यात्रा

एकबार अकबर बादशाह की दाढ़ी बनाते हुए बादशाह से नाई ने कहा महाराज क्या आपने कभी अपने पूर्वजों के बारे में सोचा है। कि वे स्वर्ग में किसी हाल में होंगे। इस अकबर सोचना क्या है मंगू वे अवश्य ही खुशहाल होंगे। आखिर वे स्वर्ग में है। इस पर मंगू नाई ने कहा किन्तु आप ने इसके लिए अवश्य पता करवाना चाहिए। केवल अपने पूर्वजों को केवल अनुमान के आधार पर छोड़ देना यह ठीक नहीं महाराज।

Akbar Birbal Kissa

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi

मंगू की ऐसी बाते सुनकर बादशाह ने कहा मंगू यह कैसी अजीब बाते आज तुम कर रहे हो यह कैसे संभव है कि हम अपने पूर्वजों के हाल जान सके। इस पर मंगू ने कहा – महाराज योगिराज बाबा के लिए यह बहुत आसान है वो किसी आपके विश्वसनीय व्यक्ति को स्वर्ग में भेजेंगे और हाल जानकार वापिस आ जायेंगे।

योगिराज बाबा यह कौन है बादशाह अकबर ने पुछा। महाराज योगिराज बाबा बड़े ही सिद्ध योगी है और हमारे वजीर अब्दुल्ला के करीबी बताये जाते हैं। यदि आप वजीर अब्दुल्ला से कहें तो वे अवश्य ही योगिराज बाबा से कहेंगे और बाबा के द्वारा हम किसी व्यक्ति को वहां भिजवाकर आपके पूर्वजों के हाल चाल पता करवा सकते हैं।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

यदि ऐसा ही मांगू तो मैं कल ही वजीर से कहकर योगिराज बाबा को दरबार में बुलवाता हूँ आखिर जाने तो सही हमारे पूर्वज ऊपर स्वर्ग में कैसे हैं। उन्हें वहां कोई तकलीफ तो नहीं। तुम्हारी इस जानकारी के लिए धन्यवाद् मंगू।

दूसरे दिन दरबार में वजीर योगिराज बाबा को बादशाह के समक्ष लाते हैं। तो श्री मान आप ही है योगिराज बाबा जो जिन्दा व्यक्ति को भी स्वर्ग भेज देते हैं। बादशाह अकबर ने योगिराज से पुछा।

हाँ महाराज हम ही वह योगिराज है जो अपनी योग माया से किसी भी प्राणी को स्वर्ग के सैर करवा सकते हैं। यदि आप आदेश दें किस व्यक्ति को स्वर्ग भेजना है। हम आप की यह इच्छा अवश्य पूरी करेंगे महाराज।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

अकबर बादशाह कहते हैं आज बड़े दिनों बाद हमें हमारे पूर्वजों की याद हो आई है। हम जानना चाहते हैं की हमारे पूर्वज वहां ऊपर सितारों के बीच आखिर कैसे जी रहे हैं। उनको कहीं वहां आसमान में कोई तकलीफ तो नहीं है।

जी महाराज बड़ा ही उत्तम विचार है आपका। आपके पूर्वज भी यह जानकर बड़े ही खुश होंगे कि मरने के बाद भी हमारा पौत्र हमारी परवाह करता है। बस हमें चाहिए योग्य व्यक्ति जो आपका विश्वसनीय हो और बुद्धिमान व समझदार भी हो जिसे मैं वहां भेज सकूं। और वह आपको आपके पूर्वजों के सभी हाल अच्छे से बता दें बस इसमें यही एक समस्या है स्वर्ग सुख देखने के बाद अधिकांश लोग वापिस लौटकर नहीं आते हैं।

हम्म्म बिलकुल सही कहा योगिराज। वजीर अब्दुल्ला आपका क्या विचार है आखिर किसे हमें स्वर्ग भेजना चाहिए। क्या आप स्वर्ग जाना चाहेगें। आप भी हमारे बड़े विश्वसनीय है। आप भली भांति जान लेंगे कि मेरे पूर्वज वहां किसी हाल में है।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

नहीं नहीं महाराज मेरा पास वहां जाने का सौभाग्य कहाँ है। मेरी बेगम का स्वास्थ्य आजकल नरम रहता है और मुझे उसका ख्याल रखना बड़ा ही जरूरी है। पर हाँ मैं आपको यह नेक सलाह दे सकता हूँ कि आपको किसे स्वर्ग भेजना चाहिए जो सबसे योग्य, विश्वसनीय और बुद्धिमान है।

ओह आपके तो इशारा करते ही मैं समझ गया आप तो मेरे प्रिय मित्र और नवरत्न राजा बीरबल जी की बात कर रहे हैं। आप का यह सुझाव वाकई प्रशंसनीय है। ऐसा कहकर बादशाह ने एक आशापूर्ण मुस्कान के साथ देखा।

बीरबल अपने स्थान से खड़े होकर महाराज को प्रणाम हैं। महाराज आपकी इच्छा की पालना में अवश्य करूँगा। योगिराज बाबा क्या आप मुझे बताएँगे कि इसके लिए मुझे क्या करना होगा।

बीरबल जी इसके लिए यमुना के तट एक विशाल अंत्येष्टि सजाई जायेगी। जिसके बीच में आपको खड़ा कर दिया जायेगा। मैं कुछ विशेष मंत्रो के साथ इस को आग लगवा दूंगा। और बिना जले हँसते हँसते सशरीर स्वर्ग को गमन कर जायेंगे। आपको स्वर्ग की यात्रा में 2 माह का समय लगेगा। बस ध्यान रहे आप इस यात्रा में स्वर्ग के सुख में इतने तल्लीन ना हो जाना कि हमें भूल जायें और और वापस ही ना आना चाहें।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से : 5 Akbar Birbal Story in Hindi

अच्छा जैसी महाराज और आपकी इच्छा योगिराज मैं महाराज की इच्छा अवशय पूरी करूँगा और दो माह बाद अवश्य स्वर्ग में हमारे पूर्वजों के हाल जानकर लौटूंगा। किन्तु मुझे अपने कुछ आवश्यक कार्य पूर्ण करने है। इसलिए चार दिन बाद मैं स्वर्ग को जाना चाहूंगा।

जी आपके अनुसार ही कार्य संपन्न होगा बीरबल जी। आप जल्दी से अपने कार्य पूर्ण करें और स्वर्ग जाने की तैयारी कर लेंवे। और ध्यान रहे आपको वहां रुकना नहीं है वापिस आना है। चाहे दो की जगह आप तीन माह का समय ले लेना।

जी हुजूर जैसी आपकी आज्ञा। मैं अवश्य लौटकर आऊंगा।

अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Kahani

चार दिन बाद यमुना के तट एक विशाल अंत्येष्टि लगाई जाती है। जिसके बीच में बीरबल जी को खड़ा कर दिया जाता है। और योगीराज मंत्र पढ़ना शुरू करते हैं। मंत्रो के साथ लकड़ियों को आग लगा दी जाती है। और वहां मौजूद सभी जनता से यह कहा जाता है। कि सभी कामना करे कि राजा बीरबल जी यह यात्रा शीघ्र पूरी हो और वह हमें वहां की तुरंत जानकारी देवे।

धीरे धीरे इस प्रकार तकरीबन दो माह हो जाते हैं। वजीर अब्दुल्ला कहता है महाराज मुझे लगता है बीरबल को स्वर्ग बहुत रास आ गया है और वे वहीँ सदा के लिए बस गए हैं। देखिये 3 माह से ऊपर होने को आ रहा है और उनकी कोई खबर नहीं है।

अकबर बीरबल की मशहूर कहानियां – Swarg Yatra

इस दिन दरबार में नाई भी मौजूद था वह भी कहता है मुझे भी लगता है महाराज, वजीर जी का कहना सही है। हमने सोचा नहीं था कि बीरबल जो आपके इतने विश्वास पात्र हैं वह आपको इस तरह धोखा देंगे।

मुझे लगता है इतनी जल्दी इस निर्णय पर जाना आपका उचित नहीं है। आपको पता है बीरबल बड़े ही बुद्धिमान है वह अवश्य सभी प्रकार से उनकी खुशलक्षेम लेने में समय व्यतीत कर रहे होंगे। मंत्री जी आप दो योगिराज बाबा को यहाँ आने का आदेश जारी करें और तुरंत साथ जाकर ले आये। हम उनसे इस विषय में मंत्रणा करना चाहते हैं।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi

अकबर बीरबल मशहूर कहानी

अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Ki Kahani

कुछ देर बाद एक व्यक्ति राजा के दरबार में आता है उसे एक चादर ओढ़ रखी थी। तथा सोल ओढ़े हुए था। उसके चेहरें और सर के बाल काफी बढे हुए थे। आते ही वह महाराज को प्राणाम करता है। अकबर बादशाह पूछते हैं आप कहाँ से आये हैं और कौन है जनाब। तो उस व्यक्ति ने उत्तर दिया मैं स्वर्ग से आ रहा हूँ और महाराज मैं आपका अजीज प्रिय नवरत्नों में से एक बीरबल हूँ।

ऐसा सुनते है बादशाह समेत सभी दरबारी उस व्यक्ति को हैरानी से देखने लगे यह बीरबल ही था इसने सामान्य वस्त्र पहने हुए थे और दाढ़ी व सर के बाल बड़े होने से पहचान में आना आसान नहीं था। वजीर अब्दुल्ला और नाई मंगू की पैरों से जमीन ही निकल गई। देखते ही अकबर ने पुछा बीरबल तुम और यह तुमने क्या हाल बना रखा है।

अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Stories in Hindi

महाराज की जय हो। महाराज मैं ऊपर स्वर्ग में आपके पूर्वजों से मिलकर आ रहा हूँ और वहीँ से मैं ने सामान्य वस्त्र भी धारण कर लिए। मैं वहां आपके पूर्वजों के साथ दो माह से ऊपर तक रहा।

इस दौरान मैं ने आपके बारे में बताया और उनके हाल चाल जाने। उन्होंने बताया कि वे सब वहां बड़े ही मजे से हैं। किन्तु वहां एक समस्या है। उन सभी के बाल बहुत बढ़ गए हैं मैं तो उनके सामने कुछ भी नहीं हूँ।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal Ke Kisse

इस दौरान मैं ने उनको आपके प्रिय मंगू नाई की विशेषताओं के बारे में बताया और मैं ने वादा कर दिया है कि बादशाह जी कहकर मंगू को कुछ माह स्वर्ग में भिजवाऊंगा ताकि वह आपके बड़े हुए बालों को काट दे। बीरबल की बादशाह से यह बात सुनते ही मंगू कांपना शुरू हो गया।

शाबाश बीरबल मैं आज ही योगिराज जी को आदेश देता हूँ कि वह अपने योग शक्ति से मंगू को स्वर्ग में भेजे और स्वर्ग भेज दे। ताकि मेरे पूर्वज अपने बड़े हुए बाल कटवा सकें। इतने में योगिराज बाबा भी वहां पहुँच गए।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal Ke Kisse

महाराज क्षमा करें क्षमा करें। कहते हुए मंगू बादशाह के चरणों में गिर गया। और रहम की भीख मांगने लगा। मुझे क्षमा करे महाराज यह सब वजीर अब्दुल्ला और योगिराज का रचा हुआ छल है। मुझे नहीं पता बीरबल जी कैसे जिन्दा बच गए किन्तु मैं तो सच में उस आग में जल जाऊंगा। मैं जलना नहीं चाहता मुझे क्षमा करें।

मंगू विस्तार से बताओ क्या बात है ? बादशाह अकबर ने डांटते हुए पुछा। महाराज दरअसल वजीर अब्दुल्ला बीरबल से बहुत ईर्ष्या और द्वेष रखते हैं। अतः वह योगिराज से मिलकर बीरबल को मारने का यह क्षडयन्त्र रचते हैं। और मैं भी उसकी का एक हिस्सा बन गया मुझे क्षमा करे।

अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal Ke Kisse

महाराज मैं आपको बताता हूँ दरअसल सीधी सी बात यह है कोई बाबा या साधु अपनी योगी शक्ति से स्वर्ग नहीं जा सकता है। उसके लिए व्यक्ति को मरना ही पड़ता है। जैसे ही योगिराज ने अंत्येष्टि लगाने की बात कही मैं सब कुछ उसी वक्त समझ गया। सो मैं आप से चार दिन का समय उस वक्त माँगा।

इन चार दिन के दौरान मैं ने अपने गुप्त सहायकों से उस स्थान से लेकर अपने घर तक एक सुरंग खुदवाई। जब योगिराज ने मुझे उस चिता के बीच खड़ा किया तो मैं सुरंग के मुंह के ऊपर खड़ा था आग लगते ही मैं सुरंग के रास्ते से अपने घर में पहुँच गया और इस समय के दौरान मैं वहीँ अपने घर पर रहा ताकि मैं अपने बाल बड़ा सकूं और इस क्षडयन्त्र का परदा पाश कर सकूँ।

राजा बीरबल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक थे। जब भी बादशाह बीरबल के समक्ष को मुश्किल घडी आती थी। या किसी न्याय के मामले में उन्हें किसी की सलाह की जरूरत होती थी तो वह बीरबल से ही सलाह लेते थे। उनकी सलाह हर बार बादशाह को अकबर को प्रभावित करने वाली होती थी और सारे दरबारी उनकी प्रसंशा करने लग जाते थे। अकबर बीरबल मशहूर कहानी | Akbar Birbal Ki Kahani पढ़े –

कुछ लोग जो उनके साथी थे। अकबर बादशाह की घनिष्ठता व विश्वास पात्र होने से उनसे ईर्ष्या भी रखते थे। और बीरबल है जो अपने आतंरिक दुश्मनों को अपनी बुद्धि चातुर्य से पछाड़ देते थे। उनकी बुद्धि के सामने बड़े से बड़े षड़यंत्र फ़ैल हो जाते थे। हर कोई जान जाता था कि बीरबल से पार पाना इतना आसान नहीं है। Akbar Birbal Ki Kahani | अकबर बीरबल स्टोरी पढ़े

इनकी कुछ कहानिया तो बड़ी शैक्षणिक भाव से प्रेरित होती थी। जैसे कि हम इस वेब पेज पर प्रथम कहानी मनहूस सूरत की बात करें। तो साफ होता है कि किसी का भी चेहरा मनहूस नहीं होता है। हर किसी को हम हमारे भाग्य की घटना के माध्यम से उसे मनहूस नहीं कह सकते हैं। इंसान को जो भी जीवन में मिलता है वह उसके कर्मों के आधार पर मिलता है। अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi पढ़े

अकबर बीरबल की दूसरी कहानी फ़ारसी व्यापारी एक सूझ बूझ भरे न्याय की मिसाल है। इस कहानी में बीरबल ने जिस तरह से चीजों को सही किया वह वाकई काबिले तारीफ़ है। उन्होंने ईमानदार और बईमान व्यापारी की बड़े ही अच्छे से परख की है। और सभी ने उनकी बात को स्वीकार भी किया। अकबर बीरबल के मशहूर किस्से | Akbar Birbal story in Hindi पढ़े

तीसरी कहानी जो मूर्खो की खोज से जुडी है वह एक प्रकार का बड़ा ही हास्यास्पद व मजेदार किस्सा है। जिस प्रकार से बादशाह मूर्खो से मिलने की इच्छा जाहिर करते हैं वह वाकई इक मूर्खता भरा विचार होता है। और सबसे बड़े मूर्ख के तौर अकबर बादशाह और खुद को प्रस्तुत करता है। यहाँ इस प्रकार मूर्ख लोगों के लिए भी एक मानवीय पहलू दर्शाया गया है। अकबर बीरबल मशहूर कहानी |

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